Thursday, October 30, 2014

अजी ये तो... उल्फत हो गयी

बड़ी रोशनी है
आपकी सीरत में
चौंधिया गए इरादे हमारे

बड़ी दिलकश है
अदाएं आपकी
उफ़....
फिसल गयी
हसरतें हमारी

इक अधूरी झलक तेरी
और
गूंगा मन
सितार सा बज उठा

पतझड़ों कि लुटी हुई
बस्ती में
आई हो बहारें जैसे
मुस्कुराने लगी फ़ज़ाएँ
पागल हुई हवाएँ

लो मैं जिसे
जानती भी नहीं
 
ज़रा सा
खयालो के कैनवास पर
उसका अक्स क्या बनाया
अजी ये तो...

उल्फत हो गयी !!
 
_____________________
© परी ऍम 'श्लोक' 

11 comments:

  1. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (31.10.2014) को "धैर्य और सहनशीलता" (चर्चा अंक-1783)" पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, चर्चा मंच पर आपका स्वागत है।

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  2. खूबसूरत शब्दों में सुन्दर विचार लिए कविता |

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  3. ओहो.......... गजब जी गजब !!! :)

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  4. ek adhuri jhalak teri or gunga man sitar sa baj utha.......bhut sundar bhav

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  5. एक जाना पहचाना उल्फत किसी अनजाने से
    बहुत खूब !

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  6. वाह नयी उमंग नयी आशाएँ... बहुत सुन्दर

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  7. बहुत ही अच्छा बेहद ही

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  8. उल्फत चीज़ ही कुछ ऐसी है ! बहुत सुन्दर रचना।

    हिंदी फोरम

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  9. ये होता है , परी जी ! खूबसूरत शब्द

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